गुरुवार, 16 नवंबर 2017

लकड़ी की गाड़ी

वो लकड़ी की गाड़ी,
मिट्टी का रोड,
चलाते थे जिसे,
बचपन मे हर रोज,
ना दुपहिया, ना चौपहिया,
थी वो छोटी सी तिपहिया,
सिखाया था जिसने,
घुटनो से ऊपर उठना,
पैरो पर खड़े होकर,
सीना ताने चलना।
--सुमन्त शेखर

बुधवार, 18 अक्तूबर 2017

दीपावली की शुभकामनाएं

है दुआ यही, धनवान बनो तुम,
स्वस्थ निरोग क्षमतावान बनो तुम,
लालच तृष्णा द्वेष क्रोध अहं का,
इस जीवन मे ही त्याग करो तुम,
दया प्रेम की भाषा बनो तुम,
सदा श्रेष्ठ इंसान बनो तुम।
--सुमन्त शेखर।

दीपावली

दीपमाला सर्वत्र बिछे,
घर आंगन सब चमके,
रिद्धि सिद्धि के स्वामी की,
सब पर कृपा बरसे,
माँ लक्ष्मी की दया से कोई,
जन मानस ना छुटे।
--सुमन्त शेखर।

मंगलवार, 17 अक्तूबर 2017

एक दिया सेना के नाम।

दूर हैं अपने घरों से आज,
सरहदों पर हैं हरदम तैनात,
जल थल हो या आकाश,
नक्सल हो या आतंकवाद,
चुनोतियों से लड़ना उनका काम,
शौर्य पराक्रम का लेते हैं जाम,

तरसते अक्सर हर घंटे दिन रात,
मिल जाये अपनो का साथ,
चलो जोड़ ले अपना हाथ,
दिया दीवाली का ले लो साथ,
करें खुशियों की एक शाम,
देश के वीर सपूतों के नाम।
-सुमन्त शेखर।

गुरुवार, 12 अक्तूबर 2017

सैलाब

इस मौसम में देखो बारिश में क्या कहर ढाया है,
मेरे शहर में अब हर जगह सैलाब आया है,

शजर था उस जमीं पे कभी ये खयाल आया है,
हर मंजर अब उजड़ा उजड़ा सा नजर आया है,

पक्की जमीनों का हौसला भी अब टूटने लगा है,
शायद सड़क थी यहां भी मुझको खयाल आया है,

भरने लगे है नदी नाले सब,
कोई फरियाद रंग लाया है,
बरसते है बादल रात दिन अब हर बखत,
मौसम में शायद कोई बदलाव आया है,

की बस कर कितना और बरसेगा तु बादल,
मेरे शहर में तू समंदर ले आया है।
--सुमन्त शेखर।

मंगलवार, 10 अक्तूबर 2017

शहर के पोखरा v2

लगल बा जाल मुसहरी,
झगवा से बचावे ला,
पोखरा के इ ह गंदा पानी,
रोज आऊ करियाए ला,
लोग तबहुँ ना कुच्छो सोचे,
ओकरे में कूड़ा डाले ला,
शहर में पोखरा घटे लगल बा,
सरकार कबहू ना सोचे ला,
करखनवो के गंदा पानी,
सब पोखरे मे डाले ला,
साफ करेला केहू ना,
खाली भाषण बाजी करेला,
उकरे में से फिर एग्गो दुग्गो,
सफाई के जिम्मा लेवेला,
गिन्नल चुन्नल काम करेला,
फ़ोटोवा खूब खिचावे ला,
उकरे से फिर तन्नी मन्नी,
जान पोखरा में आवेला।
--सुमन्त शेखर।

तालाब शहर का

लगल बा जाल मुसहरी,
झगवा से बचावे ला,
तलाबवा के पानी करियाइल,
लोग केतना कूड़ा डाले ला,
घटल बा तालाब शहर में,
सरकार कबहू ना सोचे ला,
करखनवो के गंदा पानी,
सब उकरे मे डाले ला,
साफ करेला केहू ना,
सब भाषणबाजी करेला,
उकरे में से फिर एगो दुगो,
सफाई के जिम्मा लेवेला,
जेतना शक्ति ओतना भक्ति कह,
सब फ़ोटो खूब किचावे ला,
उकरे से फिर तन्नी मन्नी,
जान तलाब में आवेला।
--सुमन्त शेखर।