शनिवार, 22 अप्रैल 2017

केन्ट आम

ना दशहरी है भाया,
ना मालदा है आया,
अल्फांसो, मल्लिका,
बैगनपल्ली, सिंधुरा,
बादामी भी लगा फीका
जब केन्ट को मैंने चखा।
कोई आम हो ऐसा,
जो तुम्हे लगा हो अच्छा,
जल्दी से बता दो रे भईया,
मुझे भी है चखना।
©सुमन्त शेखर।

गुरुवार, 30 मार्च 2017

विमान यात्रा

इंडिगो विमान में सांध्यकालीन यात्रा के दौरान महसूस किये गए कुछ पलों को आपसे साझा करना  चाहूंगा।

उड़ते हुए विमान से,
जब नीचे देखा रात में,
लगा दहकते अंगार बिछे हैं,
बिजली से रोशन घरबार से।
ऊपर चाँद,
नीचे अंगार,
मध्य में दोनों के,
इंडिगो विमान,
भीतर प्रकाशमान,
बहार घना अंधकार,
अँधेरे में लगते जुगनु,
प्रकाश से रोशन अकेले घर,
नीचे सड़कें है मानो,
कोई जलता हुआ शाख,
कहीं जलते हुए कोयले,
पर बुझी हुई राख,
कहीं एकदम लाल,
कहीं उजली सी दरार,
अन्य जगहों पर है,
कला अँधेरा बरक़रार,
तेज हवा के झोकों की,
आ रही ये आवाज,
परिचारिकायें कर रही,
चाय, पानी का व्यापार,
कोई तो पूछ ले,
इनकी मुस्कराहट का राज,
विमान के डैनों पर,
वो भुकभुकाता बल्ब,
लगता जैसे बता रहा है,
घबराओ मत, मैं हु इधर,
ठीक सर के ऊपर,
लगा है एसी का बटन,
घुमा के सेट करो
हवा ज्यादा चाहिए या कम,
बगल में लगा है एक स्पीकर,
जिसपर कैप्टेन करे है वेलकम,
और परिचारिकायें बताएं,
कौन है आज का विमान दल,
कुर्सी की पेटी बांध ले,
विमान उड़ने को तैयार है,
विमान में कितने है द्वार,
क्या आपातकालीन विचार है,
फिर से एक आवाज आई है,
विमान गंतव्य पर उतरने को तैयार है,
कर्मी दल को यह उम्मीद है,
कि उन्होंने यात्रा सुखद कराई है।
धन्यवाद....
©सुमन्त शेखर।

सोमवार, 27 मार्च 2017

योगिया

योगिया के आदेश पर,
यूपी में नवरात्र भईल,
राम मंदिर छा गइल,
मांस मच्छी बंद भईल।

भगवा के खेल बा,
विरोधी सब जलल बा,
फैलल इ अफवाह बा,
कि जोगिया न पुरा सेकुलर बा।

गोरखनाथ के मंदिर दिखल,
जहाँ न धरम-जाति के नाम दिखल,
जहाँ हिंदु मुस्लिम एक लगल,
केकरा महंत सेकुलर बुझल।

--©सुमन्त शेखर

सोमवार, 20 मार्च 2017

मुखिया

यूपी के चाल देख ए बबुआ,
मोदी के पीछे चलल हे योगिया,
आज जे है प्रदेश में मुखिया,
कल हो जाई पुरे देश के मुखिया।
--सुमन्त शेखर।

रविवार, 12 मार्च 2017

होलिका दहन

होलिका दहन हो रहा है
जला दो आज,
अपने भीतर बसे,
अहंकार, तृष्णा,
ईर्ष्या, द्वेष,
तमस को,
कल फिर मिलेंगे,
भाईचारे के सन्देश के साथ,
प्रेम, सौहाद्र की चेतना लिए,
होली की शुभकामनाओं के साथ,
आप सबो को होली की मुबारकबाद।
-- सुमन्त शेखर 🙏

सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

वाकया

गेट तो हमने भी उड़ाया था,
दीवार के बारे में सोचा भी नहीं,
वो वाकया भी बड़ा गजब था,
जो रास्ते में हमे दिखाई दिया।

वो तो एक ट्रक निकला,
जो हमसे आगे बढ़ गया,
गेट और दीवार को छोड़,
घर के भीतर घुस गया।

मेहरबाँ था आज ऊपरवाला,
नुकसान केवल आर्थिक निकला,
सड़क किनारे घर होने का,
ये भी एक नुकसान निकला।

घर था वो बड़ा मजबूत वाला,
करोड़ पति के रुतबे वाला,
ढह गया दीवार आज उसका,
ये दीवार नहीं, रुतबा था उसका।

--सुमन्त शेखर।

सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

चकोर

हमने चाँद पे नजरें लगा रखी थी,
की कहीं चाँद नजरों से ओझल ना होजाये,
कम्बख्त बादल आ गए कहीं से,
और हम चकोर ना हो पाए।
--सुमन्त शेखर।